गंवार की फली भी है चमत्कारी दवा इन रोगों को कर देती है एकदम ठीक ---
______________________________________________________
घर घर में खायी जाने वाली प्रमुख सब्जियों में से गंवार फली एक है जिसकी खेती हिन्दुस्तान में बहुत से राज्यों में वृहद स्तर पर की जाती है। हमारे देश की हर रसोई में सब्जी के तौर पर देखे जाने वाली यह वनस्पति औषधीय गुणों से भरपूर है। गंवार फली का वानस्पतिक नाम स्यामोप्सिस टेट्रागोनोलोबा है।
गंवार फली के संदर्भ में रोचक जानकारियों और परंपरागत हर्बल ज्ञान का जिक्र कर रहें हैं डॉ दीपक आचार्य (डायरेक्टर-अभुमका हर्बल प्रा. लि. अहमदाबाद)। डॉ. आचार्य पिछले 15 सालों से अधिक समय से भारत के सुदूर आदिवासी अंचलों जैसे पातालकोट (मध्यप्रदेश), डाँग (गुजरात) और अरावली (राजस्थान) से आदिवासियों के पारंपरिक ज्ञान को एकत्रित कर उन्हें आधुनिक विज्ञान की मदद से प्रमाणित करने का कार्य कर रहें हैं।
डाँग- गुजरात के आदिवासी इसकी फलियों को सुखाकर चटनी तैयार करते है और मधुमेह के रोगी को 40 दिनो तक दिन में चार बार प्रतिदिन देते है, इनका मानना है कि ये काफी फायदा करता है। कच्ची फलियों को चबाया जाए तो यह मधुमेह के रोगीयों के लिए हितकर होता है।
फलियों की अधकच्ची सब्जी सेहत के लिए अतिमहत्वपूर्ण मानी जाती है। आदिवासी अंचलों के पारंपरिक हर्बल जानकारों के अनुसार यह सब्जी हृदय के रोगियों के लिए उत्तम होती है। आधुनिक विज्ञान भी इसकी फलियों में पाए जाने वाले फाईबर को कोलेस्ट्रोल स्तर को संतुलित बनाए रखने के लिए सुयोग्य मानता है।
पातालकोट के आदिवासियों का मानना है कि फलियों के बीजों को रात भर पानी में डुबोकर रखा जाए और अगले दिन उसे कुचलकर सूजन, जोड दर्द और जलन देने वाले शारीरिक भागों पर लगाने से अतिशीघ्र आराम मिलता है।
इसकी पत्तियों को कुचलकर लगभग 4 चम्मच रस तैयार किया जाए और दूसरी तरफ 3-4 की कलियाँ लेकर कुचला जाए और अंत में गंवार फली की पत्तियों के रस और कुचले लहसुन को मिला लिया जाए और दाद, खाज और खुजली वाले अंगों पर लगाया जाए, आराम मिल जाता है।
कच्ची फलियों को पीसकर इसमें टमाटर और धनिया की हरी पत्तियों को डालकर चटनी तैयार की जाए और प्रतिदिन सेवन किया जाए तो आँखो की रौशनी बेहतर होती है और लगातार सेवन से कई बार चश्मा भी उतर जाता है।
कच्ची फलियों को अच्छी तरह से उबाल लिया जाए और उस पानी में अपने पैरों को कुछ देर तक डुबोया जाए तो फटे पैर और तालु ठीक हो जाते है।
इसके बीजों को एक उत्तम पशुआहार माना जाता है। आदिवासी अंचलों में इसकी फलियों को सुखाकर इसमें सरसों के तेल को मिलाकर चौपायों को दिया जाता है, माना जाता है कि इससे दूध उत्पादन में बढोतरी होती है।
गंवार फली को जलाकर राख तैयार कर ली जाए व इसमें सरसों का तेल डालकर लेप तैयार किया जाए और चौपायों के घाव पर लगाया जाए तो उन्हे आराम मिल जाता है।
गंवार फली को उबालकर प्राप्त रस को दमा के रोगियों को देने पर दमा की समस्या में काफी फायदा होता है। कई इलाकों में दमा रोगियों को इसकी कच्ची फलियों को चबाने की सलाह दी जाती है।
______________________________________________________
घर घर में खायी जाने वाली प्रमुख सब्जियों में से गंवार फली एक है जिसकी खेती हिन्दुस्तान में बहुत से राज्यों में वृहद स्तर पर की जाती है। हमारे देश की हर रसोई में सब्जी के तौर पर देखे जाने वाली यह वनस्पति औषधीय गुणों से भरपूर है। गंवार फली का वानस्पतिक नाम स्यामोप्सिस टेट्रागोनोलोबा है।
गंवार फली के संदर्भ में रोचक जानकारियों और परंपरागत हर्बल ज्ञान का जिक्र कर रहें हैं डॉ दीपक आचार्य (डायरेक्टर-अभुमका हर्बल प्रा. लि. अहमदाबाद)। डॉ. आचार्य पिछले 15 सालों से अधिक समय से भारत के सुदूर आदिवासी अंचलों जैसे पातालकोट (मध्यप्रदेश), डाँग (गुजरात) और अरावली (राजस्थान) से आदिवासियों के पारंपरिक ज्ञान को एकत्रित कर उन्हें आधुनिक विज्ञान की मदद से प्रमाणित करने का कार्य कर रहें हैं।
डाँग- गुजरात के आदिवासी इसकी फलियों को सुखाकर चटनी तैयार करते है और मधुमेह के रोगी को 40 दिनो तक दिन में चार बार प्रतिदिन देते है, इनका मानना है कि ये काफी फायदा करता है। कच्ची फलियों को चबाया जाए तो यह मधुमेह के रोगीयों के लिए हितकर होता है।
फलियों की अधकच्ची सब्जी सेहत के लिए अतिमहत्वपूर्ण मानी जाती है। आदिवासी अंचलों के पारंपरिक हर्बल जानकारों के अनुसार यह सब्जी हृदय के रोगियों के लिए उत्तम होती है। आधुनिक विज्ञान भी इसकी फलियों में पाए जाने वाले फाईबर को कोलेस्ट्रोल स्तर को संतुलित बनाए रखने के लिए सुयोग्य मानता है।
पातालकोट के आदिवासियों का मानना है कि फलियों के बीजों को रात भर पानी में डुबोकर रखा जाए और अगले दिन उसे कुचलकर सूजन, जोड दर्द और जलन देने वाले शारीरिक भागों पर लगाने से अतिशीघ्र आराम मिलता है।
इसकी पत्तियों को कुचलकर लगभग 4 चम्मच रस तैयार किया जाए और दूसरी तरफ 3-4 की कलियाँ लेकर कुचला जाए और अंत में गंवार फली की पत्तियों के रस और कुचले लहसुन को मिला लिया जाए और दाद, खाज और खुजली वाले अंगों पर लगाया जाए, आराम मिल जाता है।
कच्ची फलियों को पीसकर इसमें टमाटर और धनिया की हरी पत्तियों को डालकर चटनी तैयार की जाए और प्रतिदिन सेवन किया जाए तो आँखो की रौशनी बेहतर होती है और लगातार सेवन से कई बार चश्मा भी उतर जाता है।
कच्ची फलियों को अच्छी तरह से उबाल लिया जाए और उस पानी में अपने पैरों को कुछ देर तक डुबोया जाए तो फटे पैर और तालु ठीक हो जाते है।
इसके बीजों को एक उत्तम पशुआहार माना जाता है। आदिवासी अंचलों में इसकी फलियों को सुखाकर इसमें सरसों के तेल को मिलाकर चौपायों को दिया जाता है, माना जाता है कि इससे दूध उत्पादन में बढोतरी होती है।
गंवार फली को जलाकर राख तैयार कर ली जाए व इसमें सरसों का तेल डालकर लेप तैयार किया जाए और चौपायों के घाव पर लगाया जाए तो उन्हे आराम मिल जाता है।
गंवार फली को उबालकर प्राप्त रस को दमा के रोगियों को देने पर दमा की समस्या में काफी फायदा होता है। कई इलाकों में दमा रोगियों को इसकी कच्ची फलियों को चबाने की सलाह दी जाती है।
No comments:
Post a Comment